शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

माँ-भक्त संवाद-तीन

चाँद पर पानी

-देखा, तुम लोग यहाँ पूजा-पाठ और नाच-गाने में लगे रहे, वहाँ चंद्रयान ने चाँद पर पानी खोज लिया। तुम्हारे भारत देश के वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिया।
-माँ! आप भी कैसी बातें करती हैं। क्या हम लोग आपकी महिमा से परिचित नहीं हैं। भले वह चंद्रयान है, लेकिन उसने चाँद पर पानी नवरात्रि में ही खोजा। तुम जो चाहे करवा दो। हम लोगों को कुछ शक्ति दो। हम लोग धरती पर पीने का पानी खोजते-खोजते ही चंद्रयान बने हुए हैं। जिंदगी का यान पुर्जे-पुर्जे बिखर रहा है और साफ पानी दूर भाग रहा है।
-तुम लोग साफ पानी के लिए भटकते ही क्यों हो? बचपन से ही तो गंदा पानी पी रहे हो। कुएँ का पानी पिया, जिसमें बगीचेभर की पत्तियाँ गिरी पड़ी थीं। तालाब में नहाया और उसका पानी भी पिया। गाँवभर के ढोर उसमें नहाते थे। गोबर करते थे। जिस नदी का पानी पिया, उसमें शहर का गटर गिरता था। फिर नलों में जो पानी आया, वह सीवरेज लाइन से जुड़ा हुआ था। तुम्हारी आँतें गंदे पानी से ही काम करेंगी। साफ पानी पिओगे, कितने दिन जिओगे।
-माँ! हम लोग तो अभी भी उसी पानी से जिंदगानी चला रहे हैं। वह तो तुम्हारे भोग के लिए साफ पानी तलाशते रहते हैं। हम नहीं चाहते कि तुम्हारा भोग गटर के पानी से लगे। बोतल बंद पानी भी चढ़ाकर हम पाप नहीं मोल लेना चाहते। अगर तुम्हें गटर अथवा बोतलबंद पानी पसंद हो तो हमें समर्पित करने में कोई दिक्कत नहीं। पानी की जगह 'कोक' से काम चल जाए तो और अच्छा, क्योंकि धीरे-धीरे पानी की बोतल 'कोक' से महँगी होती जा रही है। जून की तपन में तो दूध और शराब भी पानी से सस्ते मिल जाते हैं। हमारी धरती का पानी उतरता जा रहा है, कुछ तो पानीदार करो माँ!
-देखो भक्तों! मैं तुम्हें शक्ति दे सकती हूँ, भक्ति दे सकती हूँ, ज्ञान दे सकती हूँ, दया दे सकती हूँ, चाहो तो धन भी दे सकती हूँ। पानी देना मेरे वश में नहीं है। सृष्टि में जो व्यवस्था बनी है उसमें पानी पेड़ ही देंगे। तुम लोग धरती पर पेड़ लगाओ, पानी अपने आप आएगा। अधिक रहेगा तो साफ भी रहेगा।
-माँ! हम भारतवर्ष के लोग अरब से खरब हो रहे हैं। अगर धरती पर पेड़ लगाएँ तो आदमी को कहाँ बसाएँ। पेड़ काट-काटकर तो रहने के लिए जगह बना रहे हैं। अपनी संतानों को तो धरती पर आने से हम हम रोक नहीं सकते। पेड़ काट सकते हैं, अतः काट रहे हैं। औलादें नहीं आएँगी तो तर्पण कौन करेगा, गया कौन ले जाएगा? तर्पण नहीं हुआ और गया नहीं गया तो मोक्ष कैसे मिलेगा? मरने के बाद पेड़ों पर घट ही तो बाँधते हैं। उसे तो बिजली के खंभे पर भी बाँध देंगे। एक बात और माँ! हम लोग हैं, इसीलिए आप भी हैं, वरना न आप न आपका ज्ञान।
(बेटों के इस कथन के बाद माँ के पास बोलने को कुछ नहीं था। वे लगभग निरुत्तर हो गईं।)

1 टिप्पणी:

समयचक्र - महेंद्र मिश्र ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति .... बहुत बढ़िया ...