शनिवार, 5 सितंबर 2009

स्वर्ग का टेंडर

बहुत ही गुप्त बात आज मैं आपको बताने जा रहा हूं। यह बात इतनी गुप्त है कि किसी को भी बताने लायक नहीं। पति पत्नियों से न कहें, पत्नियां पतियों से न कहें, पिता-पुत्र, यार-मित्र, सगे-संबंधियों के बीच तो किसी भी सूरत में इस राज का पर्दाफाश न हो। सरकारी नौकरियों की तरह जगह बहुत सीमित है। यदि किसी को भी कानोकान खबर हुई तो आपका पत्ता कट सकता है। आप धरती के इस कुम्भीपाक में पड़े रह जाएंगे, आपको स्वर्ग की कुरसी नसीब नहीं होगी। जिस तरह प्यारे प्रधानमंत्री ने आर्यावर्त का सारा बाजार अमेरिका को गिफ्ट कर दिया, जनता ने नेताजी को संविधान दिया, सरकार ने पुलिस को कानून एलॉट कर दिया, उसी तरह भगवान विष्णु ने अपने को स्वर्ग का एलॉटमेंट किया है।

मैं आपको एक बात फिर बता रहा हूं कि यह बात निहायत गुप्त है, अगर आपने इसे जरा भी लीक किया तो पंडित और मौलवी नाराज हो जाएंगे। आपके स्वर्ग की बुकिंग खटाई में पड़ जाएगी, हमारा एलॉटमेंट रद्द होगा सो अलग। आप यकीन नहीं कर पा रहे होंगे कि हम जैसे निहायत अदने आदमी को स्वर्ग की बुकिंग का काम कैसे मिल गया। आप मेरे ऊपर विश्वास कर सकें इसलिए इस कहानी को बताना जरूरी है। हुआ यह कि स्वर्ग के पुराने ठेके की अवधि समाप्त हो रही थी। नए ठेके की निविदाएं आमंत्रित करने पर विचार चल रहा था। मैने अपने अखबारनवीस होने का तत्काल लाभ लिया। स्वर्ग का जो बाबू अपने लिए सूत्र का काम करता था, उसी ने होने वाले टेंडर के बारे में जानकारी दी। शहर के टेंडर घोटालों से अपना पुराना नाता था। अखबारों में घोटाले छापते और पढ़ते पूरी प्रक्रिया की विशेषज्ञता हासिल हो गई थी। स्वर्ग के लिए होने वाले टेंडर की खबर अपन ने दबा दी। निर्धारित समय पर निविदाएं आमंत्रित की गईं। सभी देवी-देवताओं के गुर्गे-मुर्गों ने छद्म नाम से निविदाएं डाल दीं। किसी ने पांच करोड़ मुद्रा भरी, किसी ने तीन, किसी ने दो और किसी ने एक करोड़। सबसे कम मुद्रा वाली निविदा लक्ष्मीपति विष्णु के करीबी और कुबेर के सहयोगी की थी। इनके लिए स्वर्ग की बुकिंग करना कमाई का नहीं प्रतिष्ठा का विषय था। पूरे स्वर्गलोक में यह तय माना जा रहा था कि हमेशा की तरह इस वर्ष भी बाजी भगवान विष्णु के चाहने वालों के ही हाथ लगेगी।

जब निविदाएं खोली गईं तो सभी देवताओं के पांवों के नीचे से स्वर्ग खिसक गया। देवताओं में कुछ ईमानदारी बची थी, अतः उन्हें मेरी निविदा मंजूर करनी पड़ी। मेरी निविदा में शून्य रुपए में पूरी सेवा करने का कथन लिखा हुआ था। एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश का मन डोला भी कि इस निविदा को गायब करवा दिया जाए, जिससे स्वर्ग में किसी धरती के आदमी का दखल न हो, लेकिन अखबार का भय उन्हें ऐसा करने से रोक ले गया। मैने अपने आवेदन में यह टीप भी लगा रखी थी- ''मुझे मालूम है कि मुझसे कम राशि भरने की हिम्मत किसी देवी-देवता में नहीं है, अतः यह टेंडर निरस्त किया गया तो अखबारों में छापा जाएगा कि पूजा-पाठ बंद करो। जिनकी आराधना में आप लोग अपना तन, मन, धन अर्पित किए हुए हो वह भी अपने चमचों और बहू-बेटियों के लिए ईमान-धरम बेच चुका है।''

देवताओं को यह बात गड़ गई। उन्हें पता था कि धरती पर पूजने वाले जब तक हैं, तभी तक उनका देवत्व है इसलिए उन्होंने कोई खतरा नहीं उठाया। एक साल के लिए स्वर्ग का ठेका निम्नकोटि के इस प्राणी को मिल गया। स्वर्ग की बुकिंग तो अपने को मिल गई है, लेकिन फोकट में स्वर्ग का मेंटेनेन्स कैसे होगा? हजारों लीटर सोमरस, हजारों अप्सराएं, उनका मेकअप, नाच-गाने का खर्चा, यह सब कहां से आएगा? आप सबको स्वर्ग तक पहुंचाने का अरबों का खर्च कहां से निकलेगा। अतः स्वर्ग की बुकिंग का काउंटर धरती पर खोला गया है।

स्वर्ग के लिए इस बात से बहुत मतलब नहीं कि किसने कितना भजन कीर्तन किया है, किसने कितनी योग साधना की है, चारोधाम की यात्रा की है, सत्य-अहिंसा के रास्ते पर चला है, माता-पिता की सेवा की है, गुरुओं का सम्मान किया है। मतलब इस बात से है कि किसने कितना पैसा कमाया है और स्वर्ग का खर्च चलाने के लिए कौन कितना डोनेशन दे सकता है। उसी को वातानुकुलित स्वर्ग मिलेगा। स्वर्ग की बुकिंग का विज्ञापन इसलिए नहीं किया गया जिससे भीड़ अधिक न हो। वैसे मैं बहुत ही राज की बात आपको बता रहा हूं कि स्वर्ग जाने के लिए अभी तक जिन लोगों ने सम्पर्क किया है, उनमें पापियों, भ्रष्टाचारियों और अधर्मियों की संख्या सबसे अधिक है।

अपने ठेके में नई सुविधा यह है कि दान जमा होने के बाद दानदाता को पुष्पक विमान में बैठाकर सशरीर स्वर्ग ले जाया जाएगा। अर्थात नरक भी नहीं छूटेगा और स्वर्ग का मजा भी मिलेगा। भीड़ अधिक है। भाई, अंत में एक निवेदन पुनः कि यह राज मैं केवल आपको बता रहा हूं, किसी से भूल के भी मत कहिएगा, वरना आप जानिए और आपका काम।

2 टिप्‍पणियां:

bhawna ने कहा…

is vyang me aapne dharti(hamare aas paas ki duniya ) ki ghotale baaji ko bahut umda tareeke se ujagar kar diya ji

Raghu ने कहा…

Bhaisahab meri bhi swarg ki booking kar dijiye.